भारतीय राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने की पूरी कहानी
खास बात: अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन अलग-अलग अवसरों पर प्रधानमंत्री पद संभाला। पहली बार 1996 में, दूसरी बार 1998 में और 1999 में नई NDA गठबंधन सरकार के प्रमुख के रूप में उन्होंने लगातार दूसरा कार्यकाल शुरू किया।
नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनका जिक्र होते ही एक पूरा दौर आंखों के सामने आ जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी भी ऐसे ही नेताओं में शामिल हैं। उनकी पहचान सिर्फ एक प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली वक्ता, सांसद और कवि के रूप में भी रही।
लेकिन एक सवाल आज भी अक्सर पूछा जाता है— अटल बिहारी वाजपेयी कितनी बार भारत के प्रधानमंत्री बने थे?
वाजपेयी ने 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री पद संभाला और 1998 में दोबारा प्रधानमंत्री बने। 1999 में नई NDA गठबंधन सरकार के प्रमुख के रूप में उन्होंने लगातार दूसरा कार्यकाल शुरू किया।
1996: पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन सरकार सिर्फ 13 दिन चली
अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 मई 1996 को पहली बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
उस समय लोकसभा में उनकी सरकार बहुमत साबित नहीं कर सकी। परिणामस्वरूप उनका पहला प्रधानमंत्री कार्यकाल बहुत छोटा रहा और 1 जून 1996 को समाप्त हो गया।
1998: वाजपेयी ने फिर संभाली प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी
पहले छोटे कार्यकाल के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और 19 मार्च 1998 को अटल बिहारी वाजपेयी ने फिर प्रधानमंत्री पद संभाला।
उनका यह कार्यकाल 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक रहा। इस अवधि में उन्होंने गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया।
1999: NDA सरकार के साथ लगातार दूसरा कार्यकाल
1999 में लोकसभा चुनाव के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने 13 अक्टूबर 1999 को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA की नई गठबंधन सरकार के प्रमुख के रूप में प्रधानमंत्री पद संभाला।
इसे उनका लगातार दूसरा प्रधानमंत्री कार्यकाल माना जाता है। इसलिए 1998 और 1999 को अलग-अलग पूर्ण प्रधानमंत्री कार्यकाल के रूप में समझना सही नहीं होगा।
वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने की टाइमलाइन
प्रधानमंत्री बनने के तीन प्रमुख अवसर
| अवसर | तारीख | विवरण |
|---|---|---|
| पहला | 16 मई 1996 | पहली बार प्रधानमंत्री बने |
| दूसरा | 19 मार्च 1998 | दोबारा प्रधानमंत्री पद संभाला |
| तीसरा अवसर | 13 अक्टूबर 1999 | नई NDA सरकार के साथ लगातार दूसरा कार्यकाल |
वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने की कहानी क्यों खास है?
वाजपेयी की प्रधानमंत्री पद तक पहुंच एक ही चुनाव या एक ही सरकार की कहानी नहीं थी। 1996 में उन्हें सरकार बनाने का अवसर मिला, लेकिन सरकार ज्यादा समय तक नहीं चल सकी।
इसके बाद 1998 में उन्होंने फिर सत्ता संभाली और 1999 में NDA के नेतृत्व में नई गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया।
इस पूरे दौर ने भारतीय राजनीति में गठबंधन सरकारों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बनाया।
वाजपेयी की राजनीतिक पहचान सिर्फ प्रधानमंत्री तक सीमित नहीं थी
अटल बिहारी वाजपेयी लंबे समय तक भारतीय राजनीति और संसदीय जीवन में सक्रिय रहे। वे प्रभावशाली वक्ता और कवि के रूप में भी जाने जाते थे।
उनका राजनीतिक जीवन भारतीय लोकतंत्र, संसद और गठबंधन राजनीति के एक महत्वपूर्ण दौर से जुड़ा रहा।
निष्कर्ष
अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन अलग-अलग अवसरों पर प्रधानमंत्री पद संभाला— 1996 में पहली बार, 19 मार्च 1998 को दूसरी बार और 13 अक्टूबर 1999 को नई NDA गठबंधन सरकार के प्रमुख के रूप में लगातार दूसरा कार्यकाल शुरू किया।
हालांकि आधिकारिक रिकॉर्ड में 1996 का कार्यकाल अलग और 1998 से 2004 की अवधि दूसरा लगातार प्रधानमंत्री कार्यकाल दर्ज है। इसलिए “तीन बार प्रधानमंत्री पद संभाला” और “दो लगातार कार्यकाल” के बीच का अंतर समझना जरूरी है।
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